अन्धविश्वास, सड़ी-गली मान्यताओं और दकियानूसी विचारों के खिलाफ़ मैं सतत अभियान छेड़ता रहा हूँ.
मेरी शादी पर मेरे कहने पर हम दोनों की कुंडलियों का मिलान नहीं हुआ था.
मेरी बड़ी बेटी गीतिका की शादी बिना किसी मुहूर्त के शरद पूर्णिमा पर हुई थी. मैंने अपनी बेटियों का ख़ुद अपने रेज़र से मुंडन किया था.
हमारे घर में मेरी माँ दिशा-शूल आदि का बहुत ध्यान रखती थीं पर हम बच्चों ने उनकी ऐसी किसी आज्ञा का कभी पालन नहीं किया.
एक अध्यापक के रूप में मैं हमेशा अपनी विद्यार्थियों को अन्धविश्वास रूपी इस छूत की बीमारी से दूर रहने की सलाह देता था.
नवजागरणकालीन उर्दू पत्रकारिता में अन्धविश्वास के खिलाफ़ एक मुहिम छेड़ी गयी थी.
उर्दू के प्रसिद्द पत्रकार सैयद अहमद देहलवी (इनको सर सैयद अहमद समझने की गलती मत कीजिएगा) अपने समय के एक प्रगतिशील विचारक थे.
अन्धविश्वास के विरुद्ध उनके एक 112 साल पुराने लेख पर आज चर्चा की जा रही है.
अशिक्षित
स्त्रियों में अंधविश्वास का बहुत अधिक प्रसार होता है.
जादू, काला जादू, गण्डे, ताबीज़, टोटका, नज़र लगना, जिन्न, भूत, चुड़ैल, मन्नत और न
जाने किस-किस में ये विश्वास करती हैं.
स्त्री-समाज
में तो अंधविश्वासों का बोलबाला कुछ ज़्यादा ही था.
अंधविश्वास के
उन्मूलन के लिए स्त्री-शिक्षा का प्रसार अत्यन्त आवश्यक है.
दिल्ली से
प्रकाशित स्त्री-शिक्षा की समर्थक पत्रिका - 'इस्मत' के दिसम्बर, 1908 के अंक में सैयद अहमद देहलवी का लेख -
'औरतों के मनगढ़न्त मसले' प्रकाशित हुआ था.
इस लेख में
स्त्री-समाज में व्याप्त कुछ अंधविश्वासों की बानगी दृष्टव्य है –
1. पहलौटी के बच्चे को बिजली के सामने न आने दो क्यूँकि जेठे पर अक्सर बिजली
गिरती है । पहलौटी बच्चे की बहुत हिफ़ाज़त करो.
2. जिन्न वा प्रेत को यह (पहलौटी बच्चा) प्यारा होता है, भेंट (बलि)
इसकी चढ़ाई जाती है, नज़र इसको लगती है.
गरज़ कि सबसे
ज़्यादा आफतें इस पर आती हैं.
3. तीतरा बेटा (तीन लड़कियों के बाद पैदा होने वाला) मँगाता (भीख मँगाता) और तीतरी
बेटी (तीन लड़कों के बाद पैदा होने वाली) राज कराती है.
4.. बहुत पानी बरसे तो उसके पानी में तेल डाल दो, थम जाएगा.
5. सख़्त आँधी आए तो झाड़ू खड़ी कर दो, रुक जाएगी.
6. शबे बरात को परछाईं देखो, अगर नज़र आए तो जानो कि इस साल ज़िदा रहोगे
वरना समझ लो कि हमारी उम्र पूरी हो गई.
7. अगर कोई टोके यानी तारीफ़ करे तो कह दो कि अपनी ऐड़ी देखो, इसमें क्या
लगा है, ताकि उसकी टोक और नज़र न लगे. (हमारे घर में बुज़ुर्ग महिलाएं ऐसी स्थिति में - 'तेरी आँख में
चटर-पटर' कहती थीं.)
8. नाखुन कुतरो तो पोटली बाँध कर ज़मीन में दबा दो ताकि क़यामत के दिन फ़रिश्ते
ढूढ़ते न फिरें और तुमको इसका इज़ाब न हो (स्वीकृति न हो)
9. छिपकली छू जाय तो सोने के पानी से धो डालो.
10. छिपकली का नाम मुरदारी लो (कहो)
11. हाथ की चूडी टूटे तो ठन्डी हुई कहो क्योंकि बेवा होने पर चूड़ियाँ तोड़ी जाती
हैं.
12. दुपट्टा कहीं से जल जाय तो दूध से धो डालो.
13. काली खाँसी हो जाए तो काले कुत्ते को दही चटा दो.
14. जब कोई अज़ीज़ सफ़र को जाय तो उसकी पीठ को आइना दिखाओ ताकि जिस तरह जाते की पीठ
देखी है, आते का मुँह देखो.
15. जिस वक़्त ज़लज़ला (तूफ़ान) आए तो पुकार कर कहो ‘ज़ल्ले जलाल तू, आई बला को टाल तू'
16.बिल्ली रास्ता काट दे तो आगे न जाओ. बचकर निकल जाओ.
17. तीसरी तारीख़ का चाँद देखना मनहूस है.
18. कोई चीज़ तीन, तेरह लो न दो कि मुफ़ारक़त (विच्छेद) की अलामत (लक्षण) है.
19. गहन के दिन अक्सर बच्चा गहनाया (दोषयुक्त) हुआ पैदा होता है.
20. औरत की दाहिनी, मर्द की बाईं आँख फड़कनी अच्छी है, बिछड़ा हुआ अज़ीज़ मिलता है.
उसके बरख़िलाफ़
हो तो रेज़ व सदमें (बिछोह और शोक) की अलामत है.
21. मूली की पेंदी (जड़) खाने से माँ-बाप मर जाते हैं.
मर्त ब्याही
(जिसके बच्चे जीवित न रहते हों) औरत कीपरछाईं से बचो नहीं तो तुम्हारे बच्चे भी
नहीं बचेंगे.
22. जिस वक़्त बच्चा पैदा हो, फ़ौरन तवा बजा दो ताकि आवाज़ से मानूस (हिला
हुआ) हो जाय.
23. कव्वा बोले तो किसी अज़ीज़ परदेसी के आने का शगुन समझो और नाम लेकर पूछो कि क्या
फलाँ शख़्स आता है, अगर उसके नाम पर उड़ जाय तो जानो कि वह आता है.
24. साँप कुवाँरी बाली के (लड़की) साये से अंधा हो जाता है.
25. खाना खाकर हाथ
न झटको, इससे नहूसत (मनहूसियत) आती है.