मंगलवार, 11 सितंबर 2018

दो जगह जश्न

दो जगहों पर जश्न -

1. भारतीय क्रिकेट टीम, इंग्लैंड की टीम से जब एक पारी और दो सौ रन से भी ज़्यादा से हारी तो उसे जश्न मनाते देख एक दुखियारे भारतीय ने रवि शास्त्री और विराट कोहली से पूछा -
'तुम बेशर्म लोग इतनी करारी मात खाकर भी जश्न मना रहे हो. है कोई इसका जवाब तुम लोगों के पास?

रवि शास्त्री और विराट कोहली ने स्वर से स्वर मिलाते हुए एक साथ जवाब दिया -

'आप इस हार का उजला पहलू भी तो देखिए. हमको इन गोरों की दूसरी पारी की बैटिंग के समय फ़ील्डिंग नहीं करनी पड़ी और अपनी प्रेमिका/पत्नी के साथ शौपिंग करने के लिए अतिरिक्त समय भी मिल गया.'

2. तेल के चढ़ते दाम और रूपये के गिरते भाव की लगातार ख़बरें सुनकर मंत्री जी को जश्न मनाते हुए देखकर एक नादान पत्रकार ने उनसे पूछा -

'आपको तेल के चढ़ते दाम और रूपये के गिरते भाव पर तो चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए और आप जश्न मना रहे हैं?'

मंत्री जी ने मुस्कुराकर जवाब दिया -

'मूर्ख ! तुमको इस उतार-चढ़ाव का उज्जवल पक्ष देखने की अक्ल ही नहीं है.
अब तेल के दाम चढ़ेंगे तो ज़्यादातर लोग साइकिल पर चलेंगे, 11 नंबर की बस पर चलेंगे. इस से उनकी सेहत बनेगी, देश में प्रदूषण की समस्या कम होगी.
और
रूपये के गिरते भाव से हम विदेश से कुछ भी आयात करने की स्थिति में ही नहीं रहेंगे. इस से हमारा 'स्वदेशी अभियान' और 'मेक इन इंडिया अभियान' अपने आप सफल हो जाएगा.

भाव साम्य -

एक बड़े प्रसिद्द ब्रिटिश नाटककार और रंग-कर्मी थे - सैमुअल फ़ुटे. एक दुर्घटना के बाद डॉक्टर्स को उनका एक पैर काटना पड़ा. लोगबाग उन्हें सांत्वना देने पहुंचे तो उन्होंने कहा -

'इस हादसे की ब्राइटर साइड भी तो देखो. अब मेरा एक पैर कट गया है तो मुझे अपने सिर्फ़ एक जूते पर ही पॉलिश करनी होगी.'

9 टिप्‍पणियां:

  1. वाह शानदार!!
    सही है हर बुराई में से अच्छाई ढुंढते रहो और बस जीना आसान..
    सटीक सहज सरल सा करारा व्यंग ।

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    1. धन्यवाद कुसुम जी. अंग्रेज़ी के एक बड़े प्रसिद्द व्यंग्यकार थे (उनका नाम याद नहीं आ रहा). एक दुर्घटना के बाद डॉक्टर्स को उनका एक पैर काटना पड़ा. लोगबाग उन्हें सांत्वना देने पहुंचे तो उन्होंने कहा -
      'इस हादसे की ब्राइटर साइड भी तो देखो. अब मेरा एक पैर कट गया है तो मुझे अपने सिर्फ़ एक जूते पर ही पॉलिश करनी होगी.'
      फिर हमारे रवि शास्त्री, विराट कोहली और हमारे मंत्रीगण तो आशावाद में उस व्यंग्यकार से भी दो-दो हाथ आगे निकाल गए हैं.

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  2. बहुत सही जा रहे हैं। पकड़ बन रही है आपकी। थोड़ा ब्लॉग सूची बढ़ाईये। वो अपनी पसन्द के हर ब्लॉग पर जा कर उसे अनुसरण या फौलो कर के बढे‌गी। अभी तक तो आप की सूची में कम से कम सौ दोसौ ब्लॉग तो हो ही जाने चाहिये थे वैसे तो। जब आप जोड़ेंगे तभी लोग जुड़ेंगे भी।

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    1. सही कह रहे हो मित्र ! ब्लॉग फॉलो करने की प्रक्रिया में मैं बहुत कच्चा हूँ पर फॉलो करूंगा तो केवल स्तरीय और कलम के धनी लोगों को.

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  3. वाहहह.. जबरदस्त..👌
    सर इसे सकारात्मकता नहीं बेशर्मी कहना ज्यादा उचित होगा..।.अपने गलत किये को सही बताने वालों का फैशन अभी चलन में है।

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    1. धन्यवाद श्वेता जी. वैसे देश के गर्त में जाने का सारा इल्ज़ाम तो न्यूटन को दिया जाना चाहिए. अगर वह गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज न करता तो काहे को हमारा देश नीचे से नीचे गिरता ही चला जाता? चोर-डाकू उतने बेशर्म नहीं होते जितने कि हमारे नेता. और इनके तर्क-वितर्क तो भेड़िए-मेमने की कहानी वाले भेड़िए के तर्कों को भी मात करते हैं.

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  5. आदरणीय गोपेश जी--- आपकी तरह आपके विषय चयन भी खास होते हैं खिलाड़ी के तर्क स्वजन हिताय और नेताजी के तर्क बहुजन हिताय हैं | पर आदरणीय सैमुअल फ़ुटे का तर्क हरजन हिताय है | व्यंग में भावनाओं का रंग घोलता ये प्रसंग बहुत प्रेरक है आधे भरे गिलास को कोई आधा खाली कहे या आधा भरा ये उसकी अपनी अंतर्दृष्टि है | जो गंवाया उससे बचे पर संतोष करना श्रेष्ठतम मानव गुण है | सादर --

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    1. धन्यवाद रेनू जी. हाय ! सैमुअल फुटे जैसे हम न हुए. वैसे एक ज़माने में हम भी आशावादी थे. लखनऊ यूनिवर्सिटी की मन-पसंद नौकरी छूटी तो लगा कि सब कुछ चला गया. 68 दिन रोड इंस्पेक्टर रहे, फिर 8 महीने गवर्नमेंट पी. जी. कॉलेज, बागेश्वर में पढ़ाते समय रोते रहे. फिर जब कुमाऊँ विश्वविद्यालय में नियुक्ति मिली तो हम कुछ समय के लिए सैमुअल फुटे बन गए और हमने कहा -
      'इक नई उम्मीद का सपना, संजोए आ रहा हूँ,
      दर्द का एहसास है, फिर भी तराने गा रहा हूँ,
      ज़िन्दगी में खो दिया जो, क्यूँ करूं उसका हिसाब,
      आज अपने हाथ से, तक़दीर लिखने जा रहा हूँ.'

      पर फिर ये सैमुअल फुटे गायब हो गया और आधे भरे गिलास को आधा खाली गिलास कहने वाले जैसवाल साहब पुनः प्रकट हो गए.

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