मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

मोहे रंग दे

मोहे रंग दे -
1. नेताजी -‘भाइयों और बहनों, जिस दिन हमारे देश की माताओं, बहनों और बेटियों में देशभक्ति की भावना जागृत हो जाएगी उस दिन हमारा देश विश्व का सबसे अग्रणी देश बन जाएगा.’
आम आदमी - ‘आप यह क्या कह रहे हैं? क्या हमारी माताओं, बहनों और बेटियों में देशभक्ति की भावना नहीं है?’
नेताजी - ‘कहाँ है? वो तो पहनती है लाल और हरी चूड़ियाँ, कितनों को तुमने भगवा चूड़ियाँ पहने देखा है?

2. गुरूजी - ‘देशभक्ति की व्याख्या करो.’
छात्र – ‘ कौन सी गुरूजी? हरी वाली, लाल वाली या भगवा?’
3. गुरूजी –‘कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो’ के लेखक कौन हैं?’
छात्र – ‘कबीरदास.’
गुरूजी – ‘क्या मार्क्स और एंजेल्स के नाम तुमने नहीं सुने?’
छात्र – ‘इनके नाम तो मैंने सुने हैं पर इन से बहुत पहले कबीर कह गए हैं –

‘लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित, लाल,
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई, लाल.’

2 टिप्‍पणियां:

  1. डर भी नहीं रहे हैं । अच्छा लाइसेंस होगा भगवा पर लिखने का ।

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  2. हम जैसे कौओं की कांव-कांव पर कौन ध्यान देता है?

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