शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

मतदान के बाद



मतदान के बाद -
जो बीत गई सो बात गई
अगले चुनाव तक बात गयी
जिनकी आँखों का तारा था
जिनको तू बेहद प्यारा था
जिनका तू एक सहारा था
सब तुझे छोड़ कर चले गए
तुझे बीच भंवर में छोड़ गए
तू डूबे या फिर तर जाए
तू स्वर्ग पाय या नर्क जाय
कुछ फ़र्क नहीं पड़ता उनको
अब फिक्र देश की है उनको
तू निष्ठुरता के गीत सुना
तू हरजाई कह शोर मचा
वो कहाँ पलटने वाले हैं
अगले चुनाव तक हे मूरख
वो नहीं लौटने वाले हैं
जो बीत गई सो बात गई
अगले चुनाव तक बात गयी

4 टिप्‍पणियां:

  1. धन्यवाद सुशील बाबू. तुम तो उत्तराखंड के बाहुबली की छत्रछाया में ऐश कर रहे होगे.

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  2. चुनावो से बस जनता को इतना मिलता जिन नेताओं का सिर्फ नाम सुना था उनके दर्शन हो जाते हैं। बरना नेता वोट लेने के बाद कहाँ नज़र आते हैं। फिर हीं पाँच बर्ष का इन्तज़ार। जो बीतती हैं जनता पर वो जनता ही जानती हैं।
    सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

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  3. धन्यवाद सावन कुमार जी. इन नेताओं की नौटंकी और दंगल देखने से तो बेहतर है कि हम असली नौटंकी और दंगल देखें. कम से कम हमारे पैसों और वक़्त की वसूली तो होगी. नेता कभी-कभी 5 साल से पहले भी पलटकर आ जाते हैं, पर तभी जब मध्यावधि चुनाव हों. मूर्ख जनता पुराने धोखों को भूल जाती है और कोई नया धोखा खाने को तैयार हो जाती है.

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