मंगलवार, 21 मार्च 2017

सियासत



कुछ तो होते हैं मुहब्बत में जुनूं के आसार,
और कुछ लोग भी, दीवाना बना देते हैं
(ज़हीर देहलवी)

संशोधित शेर –

कुछ तो होते हैं सियासत में, ठगी के आसार,
और कुर्सी की ललक, चोर बना देती है.

चेतावनी – संशोधित शेर को आज के सन्दर्भ में देखने वाले को पाप लगेगा.

कल की बात -
 
मुहब्बत के लिए, कुछ ख़ास दिल, मख्सूस होते हैं,
ये वो नग्मा है जो, हर साज़ पे, गाया नहीं जाता.

आज की बात -

सियासत के लिए कुछ बेशरम, मख्सूस होते हैं,
ये चिकना घड़ा, हर हाट में, पाया नहीं जाता.

(मख्सूस - विशिष्ट)

2 टिप्‍पणियां:

  1. पाप तो वैसे ही लग रहा है :)

    बढ़िया ।

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  2. सियासतदानों को पाप लगे या न लगे पर हमको चूना ज़रूर लग रहा है.

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